जँ अहाँ कहियो मिथिलाक कोनो गाममे नवजात बच्चाक जन्मक छठम दिन पहुँचल होयब, तँ जरूर महसूस केने होयब जे ई दिन केवल एक संस्कार नहि, बल्कि पूरा परिवारक खुशी, उत्साह आ आस्थाक दिन होइत अछि। जन्मक बादक पहिल पाँच दिन धरि घरमे एक शांत वातावरण रहैत अछि, मुदा जखन छठम दिन अबैत अछि, तखन घर-आँगनमे एक अलग रौनक देखबाक लेल भेटैत अछि। एहि दिनकेँ मिथिलामे छठिहार कहल जाइत अछि।
लोकमान्यता अछि जे जन्मक छठम रातिमे छठी मइया अथवा विधाता माता नवजात बच्चाक भाग्य लिखय लेल अबैत छथि। बच्चाक जीवनमे की होयत, कोन दिशा मे ओकर भविष्य जाएत, ओकर भाग्य मे की लिखल अछि — एहि सभक प्रतीक रूपमे छठिहार मनाओल जाइत अछि। चाहे विज्ञान एहि बातकेँ स्वीकार करय वा नहि, मुदा मिथिलाक लोकजीवनमे ई विश्वास पीढ़ीसँ पीढ़ी चलैत आबि रहल अछि।
जन्मक बाद पहिल पाँच दिन#
बच्चाक जन्म भेला बाद घरमे खुशीक माहौल बनि जाइत अछि। दादा-दादी, नाना-नानी, काका, काकी, मामा, मौसी — सभक चेहरापर मुस्कान देखल जा सकैत अछि। मुदा एहि खुशीक संग एक जिम्मेदारी सेहो जुड़ल रहैत अछि। नवजात बच्चा आ ओकर माएक विशेष देखभाल कएल जाइत अछि।
पहिल पाँच दिन धरि माएक आराम, भोजन आ स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देल जाइत अछि। परिवारक महिलासभ बच्चा आ माएक देखभाल करैत छथि। बच्चाकेँ बेसी भीड़भाड़सँ दूर राखल जाइत अछि आ हर छोट पैघ बात पर ध्यान देल जाइत अछि।
पुरान लोकसभ कहैत छथि जे जन्मक बादक पहिल दिनसभ बच्चाक लेल बहुत महत्वपूर्ण होइत अछि, तेँ एहि समय बच्चा आ माएक सुरक्षा सभसँ पैघ प्राथमिकता होइत अछि।
छठिहारक तैयारी शुरू होइत अछि#
जखन छठम दिन नजदीक अबैत अछि, तखन घरमे तैयारी शुरू भऽ जाइत अछि। आँगन साफ कएल जाइत अछि। कतेको घरमे आइयो गोबर-माटिसँ आँगन लीपबाक परम्परा जीवित अछि। घरक महिलासभ पूजाक तैयारीमे लागि जाइत छथि।
आँगनमे सुन्दर अरिपन बनाओल जाइत अछि। मिथिलाक अरिपन केवल सजावट नहि, बल्कि शुभता आ मंगलक प्रतीक मानल जाइत अछि। घरक कोन-कोन साफ कएल जाइत अछि, कारण मान्यता अछि जे छठी मइया स्वच्छ आ पवित्र स्थान पर प्रसन्न होइत छथि।
धीरे-धीरे नातेदारसभकेँ सेहो खबर देल जाइत अछि। कतेको गाममे छठिहारक दिन नातेदारक आवागमन शुरू भऽ जाइत अछि।
छठी मइयाक पूजा#
छठिहारक मुख्य आकर्षण छठी मइयाक पूजा होइत अछि। बहुत घरमे पंडितजी आबि पूजा करबैत छथि, जबकि कतेको घरमे बुजुर्ग महिला परम्परा अनुसार पूजा सम्पन्न करैत छथि।
पूजास्थल पर कलश स्थापित कएल जाइत अछि। फल, फूल, पान, सुपारी, मखान, बताशा, अक्षत, चन्दन, धूप, दीप आ अन्य सामग्री सजाओल जाइत अछि।
पंडितजी वैदिक मन्त्रक संग पूजा प्रारम्भ करैत छथि। भगवान गणेश, कुलदेवता, कुलदेवी आ छठी मइयाक स्मरण कएल जाइत अछि। नवजात बच्चाक दीर्घायु, स्वास्थ्य, विद्या आ सुखमय जीवनक लेल प्रार्थना कएल जाइत अछि।
एहि समय परिवारक सभ सदस्य श्रद्धापूर्वक पूजा मे सहभागी होइत छथि।
विधाता माता आ भाग्य लेखनक लोकविश्वास#
छठिहारसँ जुड़ल सभसँ रोचक लोकविश्वास भाग्य लेखनक अछि।
गामक बुजुर्ग लोक कहैत छथि जे जन्मक छठम रातिमे विधाता माता अबैत छथि आ बच्चाक भाग्य लिखैत छथि। एहि कारणेँ कतेको घरमे रातिमे दीप जराओल जाइत अछि, पूजास्थल सजाओल जाइत अछि आ विशेष श्रद्धा राखल जाइत अछि।
ई एक धार्मिक विश्वास अछि, मुदा मिथिलाक लोकसंस्कृति मे एकर विशेष स्थान अछि।
लाल कलमसँ नाम लिखबाक परम्परा#
मिथिलाक बहुत परिवारमे छठिहारक दिन बच्चाक नाम पहिल बेर लिखबाक परम्परा रहैत अछि।
एकटा सफेद कागज लऽ कऽ लाल कलम अथवा लाल स्याहीसँ बच्चाक सम्भावित नाम लिखल जाइत अछि। कतेको परिवारमे राशि, नक्षत्र आ कुलपरम्परा अनुसार नामक पहिल अक्षर चुनल जाइत अछि।
जखन बच्चाक नाम पहिल बेर लिखल जाइत अछि, तखन परिवारक लोकसभक चेहरापर अलग प्रकारक खुशी देखल जाइत अछि। आखिर ई नाम जीवन भरि बच्चाक पहचान बनय वाला होइत अछि।
नवजात बच्चाक आशीर्वाद#
पूजा समाप्त भेला बाद बच्चाकेँ परिवारक बुजुर्गसभक कोरामे देल जाइत अछि।
दादा-दादी, नाना-नानी, काका-काकी, मामा-मामी, फुआ-मौसी — सभ बच्चाकेँ आशीर्वाद दैत छथि।
- ◆"बड़का विद्वान बनिहें।"
- ◆"दीर्घायु हो।"
- ◆"माता-पिताक नाम रोशन करिहें।"
एहि आशीर्वादमे केवल शब्द नहि, बल्कि पूरा परिवारक स्नेह आ शुभकामना समाहित रहैत अछि।
माएक विशेष सम्मान#
छठिहार केवल बच्चाक उत्सव नहि, बल्कि माएक सम्मानक दिन सेहो मानल जाइत अछि।
नवमाता जे प्रसवक कठिन समयसँ गुजरल छथि, हुनकर स्वास्थ्य आ आरामक विशेष ध्यान राखल जाइत अछि। घरक महिलासभ हुनका पौष्टिक भोजन दैत छथि।
कतेको घरमे छठिहारक दिन नवमाताकेँ नव वस्त्र सेहो देल जाइत अछि। एहि दिन हुनकर चेहरापर सेहो अलग प्रकारक खुशी देखल जा सकैत अछि।
मंगलगीतक परम्परा#
मिथिलाक गामसभमे छठिहारक अवसर पर महिलासभ मंगलगीत सेहो गाबैत छथि।
गीतसभमे नवजात बच्चाक उज्ज्वल भविष्य, माएक सुख आ परिवारक समृद्धिक कामना कएल जाइत अछि। एहि गीतसभसँ पूरा वातावरण आनन्दमय भऽ जाइत अछि।
आजुक समयमे ई परम्परा किछु ठाम कम भऽ रहल अछि, मुदा बहुत गाममे आइयो जीवित अछि।
प्रसाद वितरण#
पूजा सम्पन्न भेला बाद प्रसाद वितरण शुरू होइत अछि।
मखान, बताशा, फल, मिठाई आ अन्य प्रसाद उपस्थित सभ लोककेँ देल जाइत अछि। बच्चासभ प्रसाद लेल उत्साहित रहैत छथि, जबकि बुजुर्गसभ श्रद्धापूर्वक ग्रहण करैत छथि।
मामा पक्षक आगमन#
मिथिलाक परम्परामे मामा पक्षक विशेष महत्व रहैत अछि।
छठिहारक अवसर पर बहुत बेर मामा, मौसी आ नानाक घरसँ उपहार अबैत अछि। बच्चाक लेल नव कपड़ा, खिलौना, चाँदीक पायल, कड़ा अथवा अन्य उपहार देबाक परम्परा बहुत ठाम देखल जाइत अछि।
जखन मामा बच्चाकेँ कोरामे लैत छथि, तखन पूरा परिवारक खुशी दूना भऽ जाइत अछि।
माछ-भात भोज#
छठिहारक एक महत्वपूर्ण भाग भोज सेहो होइत अछि।
मिथिलाक बहुत परिवारमे एहि अवसर पर माछ-भात भोजक आयोजन कएल जाइत अछि। गाम, पड़ोस, नातेदारी आ मित्रसभकेँ निमन्त्रण देल जाइत अछि।
भोजनमे भात, दाल, तरकारी, चोखा, चटनी, माछ, दही आ मिठाई परोसल जाइत अछि। रसोईघरमे भोरसँ तैयारी चलैत रहैत अछि। महिलासभ भोजन बनबामे व्यस्त रहैत छथि, जबकि पुरुषसभ अतिथिक स्वागतमे लागल रहैत छथि।
कतेको लोक कहैत छथि जे छठिहारक माछ-भात भोजक स्वादे अलग होइत अछि, कारण ओ भोजनक संग नव जीवनक खुशी सेहो परोसल जाइत अछि।
परिवार आ समाजक एकता#
छठिहार केवल धार्मिक संस्कार नहि अछि। ई परिवार आ समाजकेँ जोड़बाक अवसर सेहो अछि।
दूर-दूर रहनिहार नातेदार एहि अवसर पर एकत्रित होइत छथि। कतेको दिन बाद सभ लोक एकठाम बैसैत छथि, गप-सप करैत छथि, बच्चाकेँ देखैत छथि आ खुशी साझा करैत छथि।
एहि प्रकारेँ छठिहार नवजात बच्चाक आगमनक खुशीकेँ केवल एक परिवार धरि सीमित नहि राखैत, बल्कि पूरा समाजक उत्सव बना दैत अछि।
बदलैत समयमे छठिहार#
समयक संग बहुत किछु बदलल अछि। गामसँ शहर धरि जीवनशैली बदलि गेल अछि। मुदा छठिहारक महत्व आइयो कम नहि भेल अछि।
आजुक युवा पीढ़ी भले आधुनिक जीवन जी रहल हो, मुदा बच्चाक जन्मक छठम दिन छठिहार मनायब नहि बिसरल अछि। कतेको परम्परा बदलल हो, मुदा छठी मइयाक पूजा, नाम लिखनाय, आशीर्वाद, प्रसाद वितरण आ भोज — ई सभ आइयो लोकक मनसँ जुड़ल अछि।
निष्कर्ष#
छठिहार संस्कार मिथिलाक सांस्कृतिक जीवनक एक सुन्दर अध्याय अछि। छठी मइयाक पूजा, विधाता द्वारा भाग्य लेखनक लोकविश्वास, लाल कलमसँ नाम लिखबाक परम्परा, नवजातक आशीर्वाद, माएक सम्मान, प्रसाद वितरण आ माछ-भात भोज — ई सभ मिलिकऽ नव जीवनक स्वागत करैत अछि।
जखन कोनो घरमे छठिहार होइत अछि, तखन ओ केवल एक संस्कार नहि रहि जाइत, बल्कि परिवारक इतिहासमे जुड़ि जाएवला एक यादगार दिन बनि जाइत अछि। मिथिलाक माटिमे रचल-बसल ई परम्परा आइयो लोकक हृदयमे ओहिना जीवित अछि, जेकाँ सदियासँ जीवित रहल अछि।
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