छठ पूजा — सूर्य, नदी आ आस्थाक महापर्व
त्योहार· 16 min

Chhath PujaFestival of the Sun, River, and Faith

छठ पूजा — सूर्य, नदी और आस्था का महापर्व

विवेक झा·10 Apr 2026

Chhath Puja — Mithila's most sacred grand festival, where sun worship, river rituals, purity, and folk culture come together.

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विवेक झा
Vivek Jha·16 min read·10 Apr 2026

छठ पूजा मिथिला, बिहार आ पूर्वाञ्चलक सर्वाधिक पवित्र आ प्राचीन लोकपर्वसभमे सँ एक अछि। ई पर्व सूर्य भगवान आ षष्ठी माताक उपासना लेल समर्पित अछि। कार्तिक मासक शुक्ल पक्षक षष्ठी तिथिकेँ मनाओल जाइत ई महापर्व केवल एकटा धार्मिक अनुष्ठान नहि, बल्कि प्रकृति, नदी, सूर्य, परिवार आ लोकसंस्कृतिक अनुपम उत्सव थिक।

मिथिलामे छठकेँ केवल "पर्व" नहि, बल्कि "महापर्व" कहल जाइत अछि। ई आस्थाक एहन उत्सव थिक जाहिमे शुद्धता, संयम, अनुशासन, श्रद्धा आ समर्पणक अद्भुत संगम देखल जाइत अछि। भारतक अतिरिक्त नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया आ विश्वक विभिन्न देशमे बसल मैथिल आ बिहारी समुदाय सेहो अत्यन्त श्रद्धापूर्वक छठ मनबैत छथि।

छठ पर्वक इतिहास आ पौराणिक आधार#

छठ पर्वक इतिहास अत्यन्त प्राचीन मानल जाइत अछि। वेदकालसँ सूर्योपासना भारतीय संस्कृति केर महत्वपूर्ण भाग रहल अछि। ऋग्वेदमे सूर्य देवताक स्तुति भेटैत अछि।

महाभारतमे उल्लेख#

मान्यता अछि जे सूर्यपुत्र कर्ण प्रतिदिन नदीमे ठाढ़ भऽ सूर्य भगवानकेँ अर्घ्य दैत छलाह। कर्णक सूर्योपासना छठ परम्पराक आधार मानल जाइत अछि। महाभारत कालमे द्रौपदी सेहो पाण्डवसभक सुख-समृद्धिक लेल सूर्य व्रत कएलनि।

रामायणमे उल्लेख#

एक मान्यता अनुसार, चौदह वर्षक वनवासक बाद अयोध्या लौटलापर भगवान राम आ माता सीता कार्तिक शुक्ल षष्ठीक दिन सूर्यदेवक पूजा कएलनि आ राज्यक कल्याणक कामना केलनि।

लोकमान्यता#

षष्ठी माता अथवा छठि मैया भगवान सूर्यक बहिन मानल जाइ छथि। लोकविश्वास अछि जे छठि मैया सन्तान, आरोग्य, समृद्धि आ सुख-शान्तिक वरदान प्रदान करैत छथि।

चारि दिनक विधि-विधान#

छठ पर्व चारि दिन धरि अत्यन्त नियम, पवित्रता आ अनुशासनक संग मनाओल जाइत अछि।

1. नहाय-खाय #

पहिल दिन व्रती नदी, पोखरि वा अन्य पवित्र जलाशयमे स्नान करैत छथि। घरक सम्पूर्ण सफाइ कएल जाइत अछि आ शुद्ध भोजन तैयार कएल जाइत अछि।

मुख्य भोजन—

  • ◆चना दाल
  • ◆कद्दूक तरकारी
  • ◆अरवा चावल
  • ◆शुद्ध घी

एहि दिनसँ व्रती पवित्र जीवनचर्याक पालन प्रारम्भ करैत छथि।

2. खरना #

दोसर दिन व्रती दिनभरि उपवास रखैत छथि। सूर्यास्तक बाद पूजा सम्पन्न कऽ प्रसाद ग्रहण करैत छथि।

खरनाक प्रमुख प्रसाद—

  • ◆रसियाव (गुड़ आ दूधसँ बनल खीर)
  • ◆घीक रोटी
  • ◆केला
  • ◆दूध

खरनाक पश्चात् व्रती 36 घंटाक निर्जला उपवास प्रारम्भ करैत छथि, जाहिमे जलक एक बूँद सेहो ग्रहण नहि कएल जाइत अछि।

3. संझिया अर्घ्य #

तेसर दिन छठ घाटपर विशेष उत्साह देखल जाइत अछि। बाँसक सुप, दउरा, नारियल, ठेकुआ, फल-फूल आ गन्नासँ सजाओल प्रसाद लऽ परिवारक लोक नदी, पोखरि वा जलाशय दिस प्रस्थान करैत छथि।

डूबैत सूर्यकेँ अर्घ्य अर्पित कएल जाइत अछि। सम्पूर्ण वातावरण लोकगीत, दीप, शंखध्वनि आ श्रद्धासँ भरि जाइत अछि।

4. उषा अर्घ्य #

चौठ दिन भोरमे उगैत सूर्यकेँ अर्घ्य देल जाइत अछि। एहि क्षणकेँ छठ पर्वक चरम क्षण मानल जाइत अछि।

अर्घ्यक पश्चात् व्रती अदरख, तुलसी, प्रसाद आ जल ग्रहण कऽ व्रत सम्पन्न करैत छथि।

छठक विशेष प्रसाद#

ठेकुआ#

गेहूँक आटा, घी आ गुड़सँ बनल ई छठक प्रमुख प्रसाद थिक।

कसार#

चावलक पीठा आ गुड़ अथवा चीनीसँ तैयार पारम्परिक प्रसाद।

नारियल#

शुद्धता, समृद्धि आ मंगलक प्रतीक।

गन्ना#

छठि मैयाक प्रिय मानल जाइत अछि।

केला, सिंघाड़ा, शरीफा, मिठा नींबू#

प्राकृतिक फलसभक विशेष स्थान अछि।

अदरख, हल्दी, मूला#

कृषि आ प्रकृतिक संग सम्बन्धक प्रतीक।

मिथिलामे छठक विशेष परम्परा#

मिथिलामे छठ केवल व्रतीक नहि, सम्पूर्ण परिवार आ समाजक सामूहिक पर्व थिक।

  • ◆घर-घरमे कोसी भरल जाइत अछि।
  • ◆अरिपन बनाओल जाइत अछि।
  • ◆बाँसक दउरा, सुप आ टोकरीक प्रयोग होइत अछि।
  • ◆माटिक दीया जलाओल जाइत अछि।
  • ◆गाम-घरक घाटक सामूहिक सफाइ कएल जाइत अछि।
  • ◆लोकसभ जाति-पाँति सँ ऊपर उठि एक-दोसराक सहयोग करैत छथि।

छठक वैज्ञानिक महत्व#

छठ केवल धार्मिक पर्व नहि, वैज्ञानिक दृष्टिसँ सेहो महत्वपूर्ण मानल जाइत अछि।

सूर्यक प्रकाश#

सूर्यक किरण शरीरक लेल आवश्यक विटामिन-D प्रदान करैत अछि।

जल चिकित्सा#

नदी वा पोखरिमे ठाढ़ भऽ ध्यान करब मानसिक शान्ति प्रदान करैत अछि।

उपवास#

दीर्घ उपवास शरीरक पाचन तंत्रकेँ विश्राम प्रदान करैत अछि।

प्राकृतिक जीवनशैली#

शुद्ध भोजन, स्वच्छता आ अनुशासन स्वास्थ्यक लेल लाभदायक मानल जाइत अछि।

छठक लोकगीत#

छठ गीत मिथिलाक सांस्कृतिक आत्मा छथि। पीढ़ी-दर-पीढ़ी ई गीत लोकक कण्ठमे जीवित छथि।

प्रसिद्ध गीत—

"केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय।

उ जे खबरी जनइबो रतिया, से फल देबउ छठि माय।।"

"काँचहि बाँस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय।"

"उग हे सूरज देव, अरघ के बेर भेल।"

"पटना के घाट पर, छठी मइया आयली।"

सामाजिक महत्व#

छठ महापर्व सम्पूर्ण समाजमे एकता, समानता आ सहयोगक भावना उत्पन्न करैत अछि। एहि पर्वमे कोनो जाति, वर्ग वा सम्प्रदायक भेद नहि रहैत अछि। सम्पूर्ण समाज एक परिवार जेकाँ एकत्र भऽ श्रद्धा आ उल्लासक संग पर्व मनबैत अछि।

निष्कर्ष#

छठ पूजा केवल सूर्यक उपासना नहि, बल्कि प्रकृति, नदी, जल, प्रकाश, अनुशासन, संयम आ मातृत्वक आराधना थिक। मिथिलाक लोकजीवनमे छठ आस्थाक सर्वोच्च प्रतीक अछि।

"सूर्य जीवन छथि, नदी संस्कार थिक, आ छठ मिथिलाक आत्मा थिक।"

जय छठि मैया।

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Originally published on MithilaDwaar · 10 April 2026 · Vivek Jha

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Cite: Chhath Puja — Festival of the Sun, River, and Faith — MithilaDwaar (https://www.mithiladwaar.com/blog/chhath-puja-mithila-ka-mahan-parva)

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