भूमिका#
मिथिलाक धरतीक चर्चा जखन होइत अछि, तखन राजा जनक, माता जानकी, महाकवि विद्यापति आ भगवान शिवक नाम अपने-आप स्मरण भऽ जाइत अछि। एहि धरतीपर अनेको शिवधाम छथि, मुदा जँ कियो पूछए जे मिथिलामे भगवान शिव अपन भक्त लेल सभसँ अद्भुत लीला कतय केने छथि, तँ अधिकांश मैथिल एकेटा नाम कहत—उगना महादेव।
मधुबनी जिलाक भवानीपुर गाममे अवस्थित ई पवित्र धाम केवल एकटा शिवमन्दिर नहि, बल्कि भक्त आ भगवानक प्रेम, विश्वास आ समर्पणक अद्भुत उदाहरण अछि। एतयक कथा हजारों वर्षसँ लोकगीत, कथा-वाचन आ मैथिली साहित्यक माध्यमसँ पीढ़ीदर-पीढ़ी सुनाओल जाइत अछि।
आइयो जखन कियो उगना महादेव पहुँचैत अछि, तँ केवल शिवलिङ्गक दर्शन नहि करैत, बल्कि ओहि स्थानकेँ प्रणाम करैत अछि जतय स्वयं भगवान शिव अपन प्रिय भक्त महाकवि विद्यापतिक सेवक बनि रहला।
उगना महादेव कतय छथि#
उगना महादेवक प्रसिद्ध मन्दिर मधुबनी जिलाक भवानीपुर गाममे अवस्थित अछि। मिथिलाक कोन-कोनासँ श्रद्धालु एतय दर्शन करबाक लेल अबैत छथि। बिहारक अतिरिक्त नेपालसँ सेहो हजारों भक्त वर्षभरि एतय पहुँचैत छथि।
सावन मास, महाशिवरात्रि आ सोमवारीक दिन एतय विशेष भीड़ रहैत अछि।
उगना नाम केना पड़ल#
लोकक अनुसार भगवान शिव अपन वास्तविक स्वरूप लुकबैत साधारण मनुष्यक रूप धारण कएलनि। ओ महाकवि विद्यापतिक सेवक बनलाह। सेवकक रूपमे हुनकर नाम छल—उगना।
ओहि दिनसँ भगवान शिवक एहि रूपकेँ लोक "उगना महादेव" नामसँ जानए लागल। कालक्रममे ई नाम सम्पूर्ण मिथिलामे प्रसिद्ध भऽ गेल।
महाकवि विद्यापति आ भगवान शिवक अद्भुत कथा#
मिथिलाक महाकवि विद्यापति केवल महान कवि नहि छलाह, ओ भगवान शिवक परम भक्त सेहो छलाह। दिन-रात भगवानक भजन, स्तुति आ आराधनामे लीन रहैत छलाह।
कहल जाइत अछि जे भगवान शिव अपन भक्तिक परीक्षा लेल पृथ्वीपर आएलाह। मुदा परीक्षा लेल नहि, बल्कि अपन भक्तक सेवा करबाक लेल।
एक दिन साधारण ग्रामीण युवकक वेशमे ओ विद्यापतिक घर पहुँचलाह।
ओ विनम्रतासँ कहलनि—
"जँ अहाँ स्वीकार करब तँ हम अहाँक सेवा करए चाहैत छी।"
विद्यापति हुनका साधारण युवक बुझि सेवकक रूपमे अपना संग राखि लेलनि। हुनकर नाम पूछलनि।
ओ उत्तर देलनि—
"हमर नाम उगना अछि।"
विद्यापति नहि जनैत छलाह जे ई साधारण युवक नहि, स्वयं भगवान शिव छथि।
उगनाक सेवा#
उगना अत्यन्त सरल, विनम्र आ परिश्रमी छलाह। ओ समयपर सभ काज करैत छलाह।
घरक काज हो, यात्रा हो, पूजा हो अथवा अन्य आवश्यकता—उगना सदिखन विद्यापतिक संग रहैत छलाह।
विद्यापति सेहो हुनका अपन परिवारक सदस्य जेकाँ मानैत छलाह।
गामक लोक सेहो उगनाक सरल स्वभावसँ प्रभावित छल।
प्यास आ गंगाजलक प्रसिद्ध घटना#
एक दिन महाकवि विद्यापति ककरो संग दूर यात्रा पर निकलल छलाह। गर्मीक समय छल। बहुत दूर चललाक बाद हुनका तीव्र प्यास लागल।
आसपास कतहु पानि नहि छल।
विद्यापति उगनासँ कहलनि—
"किछु पानि आनू, बहुत प्यास लागल अछि।"
उगना चारूकात देखलनि, मुदा कतहु जल नहि भेटल।
तखन भगवान शिव अपन वास्तविक स्वरूपक स्मरण कएलनि। अपन जटामे सँ पवित्र गंगाजल निकालि एक पात्रमे भरि विद्यापतिकेँ देलनि।
विद्यापति पानि पीबिते चकित भऽ गेलाह।
ओ कहलनि—
"एहन मधुर आ पवित्र जल तँ केवल गंगाजलक स्वाद होइत अछि।"
हुनक मनमे शंका उत्पन्न भेल।
ओ उगनासँ सत्य पूछलनि।
पहिने उगना मौन रहलाह।
मुदा बार-बार आग्रह करलापर भगवान शिव अपन वास्तविक स्वरूप प्रकट कएलनि।
महाकवि विद्यापति भगवान शिवकेँ देखिते भावविभोर भऽ गेलाह।
ओ रोइत-रोइत भगवानक चरणमे खसि पड़लाह।
भगवान शिवक एक शर्त#
भगवान शिव विद्यापतिकेँ कहलनि—
"हम तोहर भक्तिसँ प्रसन्न छी। एहि कारण तोहर सेवा करए आएल छी। मुदा एक बात मोन राखिह। जँ कखनो ककरो ई बात कहब जे हम शिव छी, तँ हम तुरन्त अन्तर्धान भऽ जाएब।"
विद्यापति ई वचन स्वीकार कएलनि।
तकर बाद पुनः भगवान शिव उगनाक रूपमे सेवा करए लगलाह।
रहस्य केना खुलल#
किछु समय बाद एक दिन घरमे कोनो काजक कारण विद्यापतिक पत्नी उगनापर बहुत रुष्ट भऽ गेली।
ओ हुनका डाँटए लगली।
कथा अनुसार हाथमे काठक टुकड़ी सेहो उठा लेलनि।
ई दृश्य देखि विद्यापति व्याकुल भऽ गेलाह।
ओ नहि चाहैत छलाह जे स्वयं भगवान शिवक अपमान हो।
घबराहटमे हुनकर मुखसँ निकलि गेल—
"रुकू, ई साधारण सेवक नहि छथि। ई स्वयं महादेव छथि।"
बस, वचन पूरा होइतहि भगवान शिव मुस्कुरेलाह।
ओ कहलनि—
"विद्यापति, अहाँ वचन निभा नहि सकलहुँ। आब हमरा जाए पड़त।"
एतबा कहि भगवान शिव अन्तर्धान भऽ गेलाह।
विद्यापतिक विरह#
भगवान शिवक अन्तर्धान भेला बाद विद्यापति बहुत व्याकुल भऽ गेलाह।
ओ जंगल-जंगल घूमि भगवानकेँ खोजए लगलाह।
रोइत-रोइत पुकारए लगलाह—
"उगना रे मोर कतय गेलहुँ..."
लोकमान्यता अछि जे विद्यापतिक अनेको शिवभक्ति पद एहि विरह भावमे रचल गेल।
आइयो मिथिलामे जखन ई कथा सुनाओल जाइत अछि तँ बहुत लोकक आँखि नम भऽ जाइत अछि।
उगना महादेव मन्दिर#
जतय भगवान शिव अन्तर्धान भेलाह, ओहि स्थानपर कालक्रममे शिवमन्दिर स्थापित भेल।
आइ उगना महादेवक रूपमे भगवान शिव एतय पूजित छथि।
मन्दिरक गर्भगृहमे शिवलिङ्ग स्थापित अछि।
प्रतिदिन भोरसँ साँझधरि श्रद्धालु दर्शन करैत छथि।
सावन आ महाशिवरात्रि#
सावन मासमे हजारों काँवरिया जल चढ़बय अबैत छथि।
प्रत्येक सोमवारी विशेष पूजा होइत अछि।
महाशिवरात्रिक अवसरपर रात्रिभरि भजन, कीर्तन, रुद्राभिषेक आ विशेष आरती होइत अछि।
मनौती#
लोकविश्वास अछि जे सच्चा मनसँ बाबा उगना महादेवसँ प्रार्थना कएलासँ मनोकामना पूर्ण होइत अछि।
बहुत लोक सन्तान, विवाह, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आ पारिवारिक सुख-शान्तिक कामनासँ एतय अबैत छथि।
मनोकामना पूर्ण भेला पर पुनः दर्शन करबाक परंपरा अछि।
मन्दिर परिसर#
मन्दिर परिसर अत्यन्त शान्त आ पवित्र वातावरणसँ भरल अछि।
घंटाक ध्वनि, धूप-दीपक सुगन्धि आ "हर-हर महादेव"क जयघोष वातावरणकेँ भक्तिमय बना दैत अछि।
भक्तसभ शिवलिङ्गपर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आ पुष्प अर्पित करैत छथि।
आइयो जीवित अछि ई कथा#
उगना महादेवक कथा केवल पुरान कथा नहि, बल्कि मिथिलाक लोकजीवनक अभिन्न भाग अछि।
गामक बुजुर्ग, कीर्तनमण्डली, कथा-वाचक आ लोकगायक आइयो एहि कथाकेँ श्रद्धापूर्वक सुनबैत छथि।
मिथिलामे भक्त आ भगवानक प्रेमक चर्चा होइत अछि तँ उगना महादेवक नाम अवश्य लेल जाइत अछि।
जखन अहाँ उगना महादेवक मन्दिरमे प्रवेश करैत छी, तँ एहन अनुभूति होइत अछि जे ई केवल पत्थरक मन्दिर नहि, बल्कि ओहि दिव्य प्रेमक साक्षी अछि जतय स्वयं भगवान शिव अपन भक्तक सेवक बनि पृथ्वीपर रहलाह। एहि कारण उगना महादेव केवल एक धार्मिक स्थल नहि, बल्कि मिथिलाक श्रद्धा, भक्ति आ लोकपरंपराक अमूल्य धरोहर छथि।






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