पुनौरा धाम : माता जानकीक प्राकट्यस्थली, मिथिलाक पवित्र तीर्थ
संस्कृति· 18 min

Punaura Dham: Mother Janaki's Birth Site and Mithila's Sacred Pilgrimage

पुनौरा धाम : माता जानकी की प्राकट्यस्थली, मिथिला का पवित्र तीर्थ

खुशी मिश्रा·1 Jul 2026

Punaura Dham in Sitamarhi — where Mother Janaki emerged from the earth, the Janma Kund, Sita Navami, and faith of crores of devotees.

Table of Contents

ख

भूमिका#

मिथिलाक नाम सुनिते सभसँ पहिने जे नाम मनमे अबैत अछि, से अछि—माता जानकी। मिथिलाक माटि माता सीताक जन्म, पालन-पोषण आ संस्कारसँ पवित्र मानल जाइत अछि। सम्पूर्ण भारतमे जतेक भगवान श्रीरामक श्रद्धालु छथि, ओतबे श्रद्धासँ लोक माता सीताक जन्मभूमिक दर्शन करबाक इच्छा रखैत छथि। एहि पवित्र भूमिमे अवस्थित पुनौरा धाम केवल एकटा धार्मिक स्थल नहि, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुक आस्थाक केन्द्र अछि।

बिहारक सीतामढ़ी जिलामे अवस्थित पुनौरा धामकेँ लोक माता जानकीक वास्तविक प्राकट्यस्थली मानैत छथि। वर्षभरि देश-विदेशसँ हजारों श्रद्धालु एतय दर्शन करबाक लेल अबैत छथि। विशेष रूपसँ विवाह पंचमी, सीता नवमी, रामनवमी आ रामनवमीक अवसरपर मन्दिर परिसर भक्तसँ भरि जाइत अछि।

एतय पहुँचैत प्रत्येक श्रद्धालुक मनमे एकेटा भावना जागैत अछि—"ई ओहि धरती अछि, जतय स्वयं धरती माताक कोखिसँ जगज्जननी सीताक प्राकट्य भेल छल।"

पुनौरा धाम कतय अछि?#

पुनौरा धाम बिहारक सीतामढ़ी जिला मुख्यालयसँ किछु दूरी पर अवस्थित अछि। ई स्थान सड़क मार्गसँ सहज रूपमे पहुँचल जा सकैत अछि। सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनसँ सेहो मन्दिर धरि पहुँचबाक सुविधा उपलब्ध अछि।

मिथिला, नेपाल, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल आ देशक विभिन्न राज्यसँ श्रद्धालु एतय अबैत छथि। रामायणसँ जुड़ल एहन कम स्थान छथि जतय माता सीताक जन्मस्थली मानल जाइत अछि, आ पुनौरा धाम ताहिमे प्रमुख अछि।

पुनौरा धाम नाम केना पड़ल?#

लोकपरंपराक अनुसार ई स्थान पहिने पुण्यारण्य अथवा पवित्र वन क्षेत्र छल। समयक संग "पुण्यारण्य" शब्द बदलैत-बदलैत "पुनौरा" भऽ गेल। एहि कारण एकरा पुनौरा धाम कहल जाए लागल।

किछु विद्वान एकरा "पुंडरीक आश्रम"सँ सेहो जोड़ैत छथि, मुदा लोकविश्वासमे माता जानकीक प्राकट्यक कारणेँ ई स्थान विशेष प्रसिद्ध भेल।

राजा जनक आ भयंकर अकालक कथा#

रामायण आ मिथिलाक लोककथासभ अनुसार एक बेर मिथिलामे भयंकर सुखाड़ पड़ल। वर्षा नहि भेला कारण खेत सुखि गेल, नदी-तालाबमे पानि घटि गेल, पशु-पक्षी व्याकुल भऽ गेल आ प्रजा कठिन संकटमे पड़ि गेल।

राजा जनक अपन प्रजाक दुःख देखि अत्यन्त चिन्तित भेलाह। ओ राजपुरोहित, ऋषि-मुनि आ विद्वानसभसँ उपाय पूछलनि।

ऋषिसभ कहलनि—

"राजन्, स्वयं भूमिक हल जोतू। धरती माताक आराधना करू। निश्चित रूपसँ शुभ फल प्राप्त होएत।"

राजा जनक स्वयं साधारण किसानक रूपमे खेतमे उतरला। राजसी वस्त्र त्यागि हल पकड़लनि आ पवित्र भूमिक जोताई आरम्भ कएलनि।

माता जानकीक दिव्य प्राकट्य#

जखन राजा जनक हल चला रहल छलाह, तखन अचानक हलक फाल किछु कठोर वस्तुसँ टकरायल।

राजा रुकलाह।

ओहि स्थानक माटि हटाओल गेल।

तखन धरतीक भीतरसँ एक दिव्य कन्या प्रकट भेली।

ओ बालिका असाधारण तेजसँ प्रकाशित छलि। चारूकात अद्भुत प्रकाश पसैरि गेल। वातावरण सुगन्धित भऽ गेल। उपस्थित सभ लोक आश्चर्यमे पड़ि गेल।

राजा जनक अत्यन्त भावविभोर भऽ गेलाह।

ओ बालिकाकेँ अपन कोरामे उठा लेलनि।

आकाशवाणी भेल—

"राजन्, ई साधारण बालिका नहि छथि। ई स्वयं लक्ष्मी स्वरूपा छथि।"

राजा जनक हुनकर नाम राखलनि—

सीता।

"सीता" शब्दक अर्थ होइत अछि—हलसँ बनल रेखा अथवा खेतक फाल।

एहि कारण माता जानकीकेँ सीता कहल गेल।

राजा जनक द्वारा पालन-पोषण#

राजा जनक आ महारानी सुनयना माता सीताकेँ अपन पुत्रीक रूपमे पालन-पोषण कएलनि।

माता जानकी बचपनेसँ अत्यन्त विनम्र, करुणामयी, तेजस्विनी आ धर्मपरायणा छलि।

मिथिलाक लोककथामे वर्णन भेटैत अछि जे बाल्यकालसँ हुनकामे असाधारण दिव्य शक्ति छल।

राजमहलमे ऋषि-मुनिक शिक्षा, वेद, धर्म, करुणा, सेवा आ संस्कारक वातावरणमे हुनकर पालन भेल।

जानकी जन्मकुण्ड#

पुनौरा धामक सभसँ पवित्र स्थलसभमे सँ एक अछि—जानकी जन्मकुण्ड।

लोकविश्वास अछि जे एहि क्षेत्रमे माता जानकीक प्राकट्य भेल छल।

श्रद्धालु जन्मकुण्डक दर्शन करैत छथि, प्रणाम करैत छथि आ अपन परिवारक सुख-शान्तिक कामना करैत छथि।

बहुत लोक एहि पवित्र जलकेँ अत्यन्त श्रद्धासँ देखैत छथि।

मन्दिर परिसर#

पुनौरा धामक वर्तमान मन्दिर अत्यन्त सुन्दर आ विशाल अछि।

मुख्य गर्भगृहमे माता जानकीक आकर्षक प्रतिमा स्थापित अछि। कतेको स्थानपर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान आ अन्य देवी-देवताक मन्दिर सेहो देखबा लेल भेटैत अछि।

मन्दिर परिसर स्वच्छ, शान्त आ आध्यात्मिक वातावरणसँ भरल रहैत अछि।

पूजा-विधि#

प्रतिदिन भोरमे मन्दिरक पट खुलैत अछि।

माता जानकीक स्नान, श्रृंगार, पुष्पार्चन, धूप, दीप आ आरती होइत अछि।

श्रद्धालु फूल, चुनरी, नारिकेल, मिठाई, फल, अगरबत्ती आ प्रसाद अर्पित करैत छथि।

बहुत महिला अपन परिवारक सुख-समृद्धि लेल विशेष पूजा करैत छथि।

सीता नवमी#

वैशाख मासमे मनाओल जाएवाली सीता नवमी पुनौरा धामक सभसँ महत्वपूर्ण पर्वसभमे सँ एक अछि।

मान्यता अछि जे एहि दिन माता जानकीक प्राकट्य भेल छल।

देश-विदेशसँ हजारों श्रद्धालु दर्शन लेल अबैत छथि।

विशेष पूजा, भजन, रामायण पाठ, कीर्तन आ महाप्रसादक आयोजन होइत अछि।

विवाह पंचमी#

मार्गशीर्ष मासमे विवाह पंचमीक अवसरपर माता सीता आ भगवान श्रीरामक दिव्य विवाहक स्मरण कएल जाइत अछि।

यद्यपि मुख्य विवाहोत्सव जनकपुर (नेपाल)मे प्रसिद्ध अछि, तथापि पुनौरा धाममे सेहो विशेष पूजा, भजन-कीर्तन आ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होइत अछि।

रामनवमी#

रामनवमीक दिन सेहो पुनौरा धाममे विशेष भीड़ रहैत अछि।

श्रद्धालु माता जानकी आ भगवान राम दुनूक संयुक्त दर्शन करैत छथि।

रामचरितमानस पाठ, सुन्दरकाण्ड, भजन आ विशेष आरती होइत अछि।

लोकविश्वास#

स्थानीय लोकक विश्वास अछि जे सच्चा मनसँ माता जानकी लग प्रार्थना कएलासँ परिवारमे सुख-शान्ति, वैवाहिक जीवनमे मधुरता, सन्तान सुख आ समृद्धि प्राप्त होइत अछि।

बहुत नवविवाहित दम्पति विवाहक बाद आशीर्वाद लेबय पुनौरा धाम अबैत छथि।

छात्र-छात्रा, किसान, व्यवसायी आ वृद्ध—सभ अपन-अपन मनोकामना लऽ माता लग उपस्थित होइत छथि।

मिथिलाक सांस्कृतिक महत्व#

माता जानकी केवल धार्मिक आस्थाक प्रतीक नहि, बल्कि मिथिलाक संस्कृति, नारी सम्मान, त्याग, धैर्य, करुणा आ मर्यादाक आदर्श छथि।

मिथिलाक विवाह गीत, सोहर, लोकगीत, मधुबनी चित्रकला आ लोकपरंपरामे माता जानकीक विशेष स्थान अछि।

एहि कारण पुनौरा धाम मिथिलाक सांस्कृतिक पहचानक केन्द्र सेहो मानल जाइत अछि।

यात्राक अनुभव#

जखन अहाँ पुनौरा धाम पहुँचैत छी, तँ वातावरणमे एक अलग प्रकारक शान्ति अनुभव होइत अछि। मन्दिरक घंटाक मधुर ध्वनि, फूलक सुगन्धि, श्रद्धालुक भक्ति आ "जय सिया राम"क जयघोष मनकेँ आनन्दसँ भरि दैत अछि।

जन्मकुण्डक कात ठाढ़ भऽ जखन ई कल्पना होइत अछि जे एहि पवित्र धरतीसँ स्वयं माता जानकी प्रकट भेल छथि, तँ शरीरमे रोमाञ्च उत्पन्न भऽ जाइत अछि। गर्भगृहमे माता जानकीक दर्शन करैत समय श्रद्धालु सहज भावसँ अपन दुःख, आशा आ प्रार्थना माता समक्ष अर्पित करैत छथि।

मन्दिरसँ बाहर निकलैत समय बहुत लोक पुनः मुड़ि कऽ माता केँ प्रणाम करैत छथि। ओहि क्षण एहन अनुभव होइत अछि जे मानो मिथिलाक माटि स्वयं अपन स्नेहसँ प्रत्येक आगन्तुककेँ आशीर्वाद दऽ रहल अछि।

एहि कारण पुनौरा धाम केवल एक तीर्थ नहि, बल्कि सम्पूर्ण मिथिलाक आत्मा, माता जानकीक असीम ममता आ सनातन संस्कृतिक अमर प्रतीक मानल जाइत अछि। जे कियो एक बेर एतय अबैत अछि, ओ अपन संग केवल प्रसाद नहि, बल्कि श्रद्धा, शान्ति आ मातृस्नेहक अमिट अनुभूति लऽ घुरैत अछि।

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Originally published on MithilaDwaar · 1 July 2026 · Khushi Mishra

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Cite: Punaura Dham: Mother Janaki's Birth Site and Mithila's Sacred Pilgrimage — MithilaDwaar (https://www.mithiladwaar.com/blog/punaura-dham-sitamarhi)

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