भूमिका#
जखन मिथिलाक चर्चा होइत अछि, तखन माता जानकीक स्मरण अपने-आप भऽ जाइत अछि। मिथिलाक प्रत्येक कण-कणमे माता सीताक स्मृति बसल अछि। एतयक नदी, पोखरि, कुण्ड, मन्दिर, लोकगीत आ लोककथासभ आइयो हुनकर जीवनक अनेक प्रसंगकेँ जीवित रखने अछि। एहनहि एक अत्यन्त पवित्र स्थल अछि सीता कुण्ड, जतय श्रद्धा, इतिहास आ लोकविश्वासक अद्भुत संगम देखबा लेल भेटैत अछि।
बिहारक सीतामढ़ी क्षेत्रमे अवस्थित ई पवित्र कुण्ड हजारों श्रद्धालुक आस्थाक केन्द्र अछि। किछु लोक एकरा माता जानकीक स्नानस्थली मानैत छथि, तँ किछु स्थानीय परंपरामे एकर सम्बन्ध हुनकर दिव्य जीवनक अन्य प्रसंगसँ जोड़ल जाइत अछि। यद्यपि विभिन्न जनश्रुतिमे कथामे अन्तर भेटैत अछि, मुदा एक बात सभ मानैत छथि—ई स्थान माता जानकीप्रति अपार श्रद्धाक प्रतीक अछि।
सीता कुण्ड कतय अछि?#
सीता कुण्ड बिहारक सीतामढ़ी जिलामे अवस्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल अछि। पुनौरा धाम आ जानकी जन्मस्थलीक दर्शन करय आबयवला अधिकांश श्रद्धालु सीता कुण्डमे सेहो अवश्य जाइत छथि। एतय वर्षभरि दर्शनार्थी अबैत रहैत छथि, मुदा सीता नवमी, रामनवमी, विवाह पंचमी आ अन्य धार्मिक अवसरपर विशेष भीड़ रहैत अछि।
इतिहास आ लोकपरंपरा#
मिथिलाक लोकपरंपरामे सीता कुण्डक उल्लेख बहुत सम्मानसँ कएल जाइत अछि। मान्यता अछि जे ई स्थान माता जानकीक जीवनसँ जुड़ल एक पवित्र स्मृति स्थल अछि। पीढ़ीसँ पीढ़ी लोक एहि कुण्डक कथा सुनबैत आबि रहल छथि।
किछु जनश्रुति अनुसार माता सीता बाल्यकालमे अपन सखीसभक संग एहि क्षेत्रमे आबैत छलि। ओ प्रकृतिक बहुत प्रेमी छलि। बाग-बगीचा, फूल, वृक्ष आ जलाशयसँ हुनकर विशेष लगाव छल। एहि कारण लोकमान्यता अछि जे ई कुण्ड हुनकर प्रिय स्थानसभमे सँ एक छल।
आन स्थानीय मान्यतामे कहल जाइत अछि जे विवाहोपरान्त अथवा विशेष धार्मिक अवसरपर माता जानकी एहि स्थानपर पूजा-अर्चना कएलनि। यद्यपि एहि सम्बन्धमे प्राचीन ग्रन्थसभमे स्पष्ट उल्लेख नहि भेटैत अछि, मुदा स्थानीय लोकविश्वास एहि स्थानकेँ अत्यन्त पवित्र मानैत अछि।
सीता कुण्डक जल#
सीता कुण्डक जलकेँ स्थानीय लोक अत्यन्त पवित्र मानैत छथि। श्रद्धालु कुण्डक कात प्रणाम करैत छथि, जल अर्पित करैत छथि आ अपन परिवारक मंगलक कामना करैत छथि।
पहिने बहुत लोक पूजा-पाठक लेल एहि कुण्डक जल उपयोग करैत छलाह। आइ प्रशासन आ मन्दिर समितिक देखरेखमे एकर स्वच्छता बनौने रखबाक प्रयास होइत अछि।
मन्दिर परिसर#
सीता कुण्ड परिसर अत्यन्त शान्त आ आध्यात्मिक वातावरणसँ भरल अछि। कुण्डक आसपास मन्दिर, पूजा स्थल, वृक्ष आ विश्रामक स्थान बनाओल गेल अछि। श्रद्धालु एतय बैसि ध्यान, जप आ प्रार्थना करैत छथि।
भोरमे सूर्यक पहिल किरण जखन कुण्डक जलपर पड़ैत अछि तँ दृश्य अत्यन्त मनमोहक लगैत अछि। साँझमे दीप आ आरतीक प्रकाश जलमे प्रतिबिम्बित भऽ सुन्दर वातावरण उत्पन्न करैत अछि।
पूजा-विधि#
श्रद्धालु पहिने कुण्डक दर्शन करैत छथि, तकर बाद माता जानकीकेँ फूल, चुनरी, सिन्दूर, नारिकेल, फल आ मिठाई अर्पित करैत छथि। बहुत महिला अपन परिवारक सुख-समृद्धि, दाम्पत्य जीवनक मंगल आ सन्तानक उज्ज्वल भविष्यक लेल विशेष प्रार्थना करैत छथि।
रामायण पाठ, सुन्दरकाण्ड, सीता-राम नाम संकीर्तन आ भजन-कीर्तन सेहो समय-समयपर आयोजित होइत अछि।
सीता नवमी#
सीता नवमी सीता कुण्डक सभसँ प्रमुख पर्वसभमे सँ एक अछि। मान्यता अनुसार एहि दिन माता जानकीक प्राकट्य भेल छल। एहि अवसरपर विशेष पूजा, अभिषेक, भजन-कीर्तन, रामायण पाठ आ महाप्रसादक आयोजन होइत अछि। हजारों श्रद्धालु एहि दिन दर्शन लेल अबैत छथि।
विवाह पंचमी#
विवाह पंचमीक अवसरपर माता सीता आ भगवान श्रीरामक दिव्य विवाहक स्मरण कएल जाइत अछि। सीता कुण्ड परिसरमे सेहो धार्मिक कार्यक्रम, कथा-वाचन आ विशेष आरती आयोजित होइत अछि। नवविवाहित दम्पति एहि अवसरपर माता-पिताक संग दर्शन करबाक लेल अबैत छथि।
रामनवमी#
रामनवमीक दिन भगवान श्रीरामक संग माता जानकीक संयुक्त पूजा होइत अछि। श्रद्धालु "जय सिया राम"क जयघोष करैत मन्दिर परिसरमे भक्ति वातावरण उत्पन्न करैत छथि।
लोकविश्वास#
स्थानीय लोकमान्यता अछि जे सच्चा मनसँ माता जानकीकेँ स्मरण कएलासँ पारिवारिक जीवनमे सुख-शान्ति बनल रहैत अछि। विशेष रूपसँ महिला सभ वैवाहिक सुख, सन्तान, परिवारक मंगल आ दीर्घ आयुक लेल माता लग प्रार्थना करैत छथि।
बहुत श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण भेला पर पुनः एतय आबि प्रसाद वितरण करैत छथि।
मिथिलाक संस्कृति आ सीता कुण्ड#
सीता कुण्ड केवल धार्मिक स्थल नहि, बल्कि मिथिलाक सांस्कृतिक स्मृतिक प्रतीक सेहो अछि। मैथिली लोकगीत, सोहर, विवाह गीत, मधुबनी चित्रकला आ लोककथामे माता जानकीक उल्लेख विशेष सम्मानसँ कएल जाइत अछि।
मिथिलाक बेटीसभ माता सीताकेँ आदर्श नारीक रूपमे स्मरण करैत छथि। त्याग, धैर्य, करुणा, मर्यादा आ आत्मबलक प्रतीक रूपमे हुनकर जीवन आइयो प्रेरणा दैत अछि।
यात्राक अनुभव#
जखन अहाँ सीता कुण्ड पहुँचैत छी, तँ चारूकात पसैरल शान्त वातावरण मनकेँ अपन दिस आकर्षित करैत अछि। कुण्डक कात बहैत मन्द पवन, मन्दिरक घंटाध्वनि आ श्रद्धालुक प्रार्थना मनमे अलग प्रकारक शान्ति भरि दैत अछि।
कुण्डक जल दिस निहारैत सहज मनमे ई भावना अबैत अछि जे ई मिथिलाक ओहि पावन भूमिक एक अंश अछि, जतय माता जानकीक स्मृति आइयो जीवित अछि। श्रद्धालु हाथ जोड़ि माता लग अपन मनक बात कहैत छथि, किछु लोक मौन ध्यान करैत छथि, तँ किछु परिवारक संग प्रसाद ग्रहण करैत छथि।
जखन अहाँ एतयसँ घुरैत छी, तँ केवल एकटा धार्मिक स्थल देखबाक अनुभव नहि होइत, बल्कि एहन अनुभूति होइत अछि जे मिथिलाक संस्कृति, श्रद्धा आ माता जानकीक ममतामय स्मृतिसँ भरल एक पवित्र यात्रा सम्पन्न भेल। एहि कारण सीता कुण्ड आइयो मिथिलाक प्रमुख धार्मिक स्थलसभमे अपन विशेष स्थान बनाएने अछि आ प्रत्येक श्रद्धालुक मनमे श्रद्धा आ विश्वासक दीप प्रज्वलित करैत रहैत अछि।
How did this make you feel?
Read next
Recommended
Punaura Dham — Mata Janakik Prakatyasthali
18 min read




After the story
Comments (0)
Sign in to share your thoughts on this article.