सीतामढ़ी बिहारक उत्तर भागमे अवस्थित एकटा ऐतिहासिक, धार्मिक आ सांस्कृतिक दृष्टिसँ अत्यन्त महत्वपूर्ण जिला अछि। ई स्थान हिन्दू धर्मावलम्बीसभक लेल विशेष श्रद्धाक केन्द्र मानल जाइत अछि, कारण लोकविश्वास अनुसार माता जानकी (सीता)क प्राकट्य एतहि भेल छल। ताहि कारण सीतामढ़ीकेँ "जानकीक नगरी", "सीताक जन्मभूमि" आ "मिथिलाक तीर्थ" कहल जाइत अछि।
रामायण कालसँ जुड़ल एहि भूमिक महत्त्व केवल भारतमे नहि, बल्कि नेपाल आ सम्पूर्ण विश्वक रामभक्तसभक बीच अपार अछि। प्रतिवर्ष हजारों-लाखों श्रद्धालु माता जानकीक दर्शन लेल सीतामढ़ी अबैत छथि।
पौराणिक महत्त्व#
वाल्मीकि रामायण आ लोकमान्यता अनुसार मिथिलाक राजा जनक एकबेर भयंकर अकालक समय यज्ञक लेल स्वयं हल जोतैत छलाह। ओहि समय धरतीसँ एक दिव्य कन्याकेँ प्राप्त कएलनि। एहि कन्याक नाम "सीता" राखल गेल, कारण संस्कृतमे हलक फालसँ बनल रेखाकेँ "सीता" कहल जाइत अछि।
माता सीता भगवान श्रीरामक अर्धांगिनी, त्याग, धैर्य, पतिव्रता धर्म आ आदर्श नारीत्वक प्रतीक मानल जाइ छथि। ताहि कारण सीतामढ़ी सम्पूर्ण हिन्दू समाजक लेल अत्यन्त पवित्र स्थान मानल जाइत अछि।
पुनौरा धाममाता जानकीक प्राकट्य स्थल#
सीतामढ़ी शहरसँ लगभग 5 किलोमीटर दूर अवस्थित पुनौरा धाम केँ माता सीताक जन्मस्थान मानल जाइत अछि। ई सम्पूर्ण मिथिलाक प्रमुख तीर्थस्थलसभमे सँ एक अछि।
लोकविश्वास अनुसार राजा जनक एतहि यज्ञक लेल भूमि जोतैत समय धरतीसँ माता जानकीकेँ प्राप्त कएलनि।
पुनौरा धाममे स्थित—
जानकी जन्म मन्दिर
पवित्र सीता कुण्ड
यज्ञशाला
संत-आश्रम
— श्रद्धालुसभक आकर्षणक प्रमुख केन्द्र छथि।
एहि स्थानक वातावरण अत्यन्त शान्त, आध्यात्मिक आ भक्तिमय रहैत अछि।
जानकी मन्दिर#
सीतामढ़ी नगरमे स्थित जानकी मन्दिर प्रमुख धार्मिक केन्द्र थिक। एहि मन्दिरमे माता जानकीक भव्य प्रतिमा स्थापित अछि। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु एतय पूजा-अर्चना करबाक लेल अबैत छथि।
रामनवमी, जानकी नवमी, विवाह पंचमी आ अन्य पर्वसभक अवसरपर विशेष भीड़ देखल जाइत अछि।
सीता कुण्ड#
पुनौरा धाममे स्थित सीता कुण्ड अत्यन्त पवित्र मानल जाइत अछि। लोकविश्वास अछि जे एहि कुण्डक जल पुण्यदायक आ पवित्र अछि। श्रद्धालु एतय स्नान कऽ माता जानकीक दर्शन करैत छथि।
हलेश्वर स्थान#
हलेश्वर स्थान सीतामढ़ीक प्रमुख शिवधामसभमे सँ एक अछि। मान्यता अछि जे राजा जनक द्वारा यज्ञ प्रारम्भ करबाक पूर्व भगवान शिवक पूजा एतहि कएल गेल छल।
एतय स्थित प्राचीन शिवमन्दिर सम्पूर्ण मिथिलामे विशेष श्रद्धाक केन्द्र मानल जाइत अछि।
महाशिवरात्रिक अवसरपर हजारों भक्त जलाभिषेक करबाक लेल अबैत छथि।
बागही मठ#
बागही मठ सीतामढ़ीक एक प्राचीन धार्मिक केन्द्र थिक। ई स्थान साधु-सन्त, वैष्णव परम्परा आ आध्यात्मिक गतिविधिसभक लेल प्रसिद्ध अछि।
प्रमुख तीर्थस्थल#
|------|---------|
जानकी नवमी#
वैशाख मासक शुक्ल नवमीक दिन जानकी नवमी अत्यन्त धूमधामसँ मनाओल जाइत अछि। ई माता जानकीक प्राकट्य दिवस मानल जाइत अछि।
एहि अवसरपर—
- ◆विशेष पूजा-अर्चना
- ◆शोभायात्रा
- ◆भजन-कीर्तन
- ◆रामायण पाठ
- ◆सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजित कएल जाइत अछि।
भारत, नेपाल आ अन्य देशसभसँ लाखों श्रद्धालु एहि अवसरपर सीतामढ़ी पहुँचैत छथि।
विवाह पंचमी#
मार्गशीर्ष मासमे विवाह पंचमीक अवसरपर सेहो सीतामढ़ीमे विशेष उत्सव मनाओल जाइत अछि। राम-जानकी विवाहक स्मृतिमे अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होइत अछि।
सांस्कृतिक महत्त्व#
सीतामढ़ी केवल धार्मिक नगरी नहि, बल्कि मिथिलाक भाषा, संस्कृति, लोकगीत, मधुबनी कला आ परम्परासभक महत्वपूर्ण केन्द्र सेहो थिक।
एतय मैथिली भाषा, विवाह गीत, सोहर, समदाउन, भजन आ लोकसंगीतक समृद्ध परम्परा आइयो जीवित अछि।
पर्यटन आ धार्मिक यात्रा#
सीतामढ़ी भारत-नेपाल धार्मिक पर्यटन परिपथक महत्वपूर्ण भाग थिक। जनकपुरधाम (नेपाल) आ अयोध्यासँ जुड़ल रामायण सर्किटमे सीतामढ़ीक विशेष स्थान अछि।
प्रत्येक वर्ष हजारों पर्यटक आ श्रद्धालु एहि पवित्र भूमिक दर्शन करबाक लेल अबैत छथि।
लोकगीत#
मिथिलामे माता जानकीक प्रति श्रद्धा व्यक्त करैत अनेक लोकगीत गाओल जाइत अछि—
"सीता माँ के दर्शन पाइब,
पुनौरा धाम जाइब।
मनक सब दुःख बिसराइब,
जानकी चरणमे शीश नवाइब।।"
"जय-जय सीता जनक दुलारी,
मिथिलाक बेटी, जग जननी प्यारी।।"
निष्कर्ष#
सीतामढ़ी केवल एक जिला नहि, बल्कि श्रद्धा, इतिहास, संस्कृति आ आध्यात्मिक चेतनाक केन्द्र थिक। माता जानकीक जन्मभूमि होयबाक कारण एहि भूमिक महत्त्व सम्पूर्ण विश्वक रामभक्तसभक लेल विशेष अछि।
मिथिलाक आत्मामे जँ माता जानकी बसैत छथि, तँ सीतामढ़ी हुनकर पावन धाम थिक।
"जय सिया राम। जय जानकी।"







After the story
Comments (0)
Sign in to share your thoughts on this article.