श्री दुर्गा चालीसा — पूर्ण पाठ
त्योहार· 12 min

Shri Durga ChalisaComplete Text

श्री दुर्गा चालीसा — पूर्ण पाठ

शिवम झा·14 Jul 2026

Beloved Navratri and Durga Puja hymn — the complete Shri Durga Chalisa dohas and chaupais for Maithil homes.

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श
शिवम झा
Shivam Jha·12 min read·14 Jul 2026

मैथिल घरमे नवरात्रि, दुर्गा पूजा आ रोजक भक्तिमे श्री दुर्गा चालीसाक पाठ अत्यन्त प्रिय अछि। दोहा आ चौपाईसँ माँक रूप, लीला आ कृपाक वर्णन होइत अछि। साँझ-भोर आरतीक संग वा एकाग्र मनसँ पाठ करू।

पूर्ण पाठ#

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।

नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

>

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।

तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला।

नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

>

रूप मातु को अधिक सुहावे।

दरश करत जन अति सुख पावे॥

>

तुम संसार शक्ति लै कीना।

पालन हेतु अन्न धन दीना॥

>

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।

तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

>

प्रलयकाल सब नाशन हारी।

तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

>

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।

ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

>

रूप सरस्वती को तुम धारा।

दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

>

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।

परगट भई फाड़कर खम्भा॥

>

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।

हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

>

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।

श्री नारायण अंग समाहीं॥

>

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।

दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

>

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।

महिमा अमित न जात बखानी॥

>

मातंगी धूमावति माता।

भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥

>

श्री भैरव तारा जग तारिणी।

छिन्नभाल भव दुःख निवारिणी॥

>

केहरि वाहन सोह भवानी।

लांगुर वीर चलत अगवानी॥

>

कर में खप्पर खड्ग विराजै।

जाको देख काल डर भाजै॥

>

सोहै अस्त्र और त्रिशूला।

जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

>

नगरकोट में तुम्हीं विराजत।

तिहुँ लोक में डंका बाजत॥

>

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।

रक्तबीज संहारे॥

>

महिषासुर नृप अति अभिमानी।

जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

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रूप कराल कालिका धारा।

सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

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परी गाढ़ संतों पर जब जब।

भई सहाय मातु तुम तब तब॥

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अमरपुरी अरु बासव लोका।

तव महिमा सब रहें अशोका॥

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ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।

तुम्हें सदा पूजें नर नारी॥

>

प्रेम भक्ति से जो यश गावै।

दुःख दारिद्र निकट नहिं आवै॥

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ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।

जन्म मरण ताकौ छुटि जाई॥

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योगी सुर मुनि कहत पुकारी।

योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

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शंकर आचारज तप कीनो।

काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥

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निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।

काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

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शक्ति रूप का मर्म न पायो।

शक्ति गई तब मन पछितायो॥

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शरणागत हुई कीर्ति बखानी।

जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

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भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।

दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

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मोको मातु कष्ट अति घेरो।

तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

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आशा तृष्णा निपट सतावै।

रिपु मूरख मोहिं अति डरपावै॥

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शत्रु नाश कीजै महारानी।

सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

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करो कृपा हे मातु दयाला।

ऋद्धि सिद्धि दे करहु निहाला॥

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जब लग जियूँ दया फल पाऊँ।

तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ॥

>

दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।

सब सुख भोग परम पद पावै॥

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देवीदास शरण निज जानी।

करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

शरणागत रक्षा करि, भक्त रहे निःशंक।

जय जय जय जगदम्बे, जय जय दुर्गे अंक॥

पाठक लाभमैथिल श्रद्धा#

जे प्रेम आ भक्तिसँ दुर्गा चालीसा गाबैत छथि, लोक विश्वास अनुसार दुःख-दारिद्र दूर रहैत अछि आ मनमे शांति अबैत अछि। पूजाक पूर्ण सामग्री लेल देखू दुर्गा पूजा सामग्री सूची आ महत्त्व लेल दुर्गा पूजा — मिथिलाक महापर्व।

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Originally published on MithilaDwaar · 14 July 2026 · Shivam Jha

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