माँ दुर्गा आरती संग्रह — जय अम्बे गौरी, जगदम्बे काली आ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये
त्योहार· 14 min

Maa Durga Aarti CollectionJai Ambe Gauri, Jagdambe Kali & Sarvamangala

माँ दुर्गा आरती संग्रह — जय अम्बे गौरी, जगदम्बे काली और सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये

शिवम झा·14 Jul 2026

Three beloved Durga aartis for Maithil homes — Jai Ambe Gauri, Ambe Tu Hai Jagdambe Kali, and Sarvamangala Mangalye with brief meaning.

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शिवम झा
Shivam Jha·14 min read·14 Jul 2026

नवरात्रि आ दुर्गा पूजाक साँझ जखन दीप-शंख बजैत अछि, मैथिल घरमे माँक आरती गेनाइ एकटा जीवित परंपरा थिक। एहि लेखमे तीन प्रिय स्तुति — जय अम्बे गौरी, अम्बे तू है जगदम्बे काली, आ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये — पूर्ण रूपसँ देल गेल अछि।

1. जय अम्बे गौरीमाँ दुर्गा आरती#

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

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माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥

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कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजै॥

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केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

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कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥

>

शुम्भ-निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

>

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

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ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

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चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरू।

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

>

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥

>

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥

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कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

>

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥

2. अम्बे तू है जगदम्बे काली#

अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली।

तेरे ही गुण गाएँ भारती,

ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

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तेरे भक्त जनों पर माता,

भीर पड़ी है भारी।

दानव दल पर टूट पड़ो माँ,

करके सिंह सवारी॥

>

सौ-सौ सिंहों से है बलशाली,

अष्टभुजा वाली।

दुष्टों का तू नाम मिटाए,

भक्तों की रखवाली॥

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माँ-बेटे का है इस जग में,

बड़ा ही निर्मल नाता।

पूत कपूत सुने हैं पर ना,

माता सुनी कुमाता॥

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सब पर करुणा बरसाने वाली,

अमृत बरसाने वाली।

दीन-दुखी के संकट हरने,

आई सिंह सवारी॥

>

जो कोई श्रद्धा से गावे,

मनवांछित फल पावे।

सुख-सम्पत्ति घर में आवे,

दुःख-दरिद्र मिट जावे॥

>

अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली।

ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

3. सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये#

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

>

सृष्टि-स्थिति-विनाशानां शक्तिभूते सनातनि।

गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

>

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

>

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।

भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

>

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा

रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां

त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

अर्थ (संक्षेपमे)#

  • ◆सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये — सभ मंगलक सर्वोत्तम मंगलमयी माता
  • ◆शिवे — कल्याणस्वरूपिणी
  • ◆सर्वार्थसाधिके — सभ शुभ काज सिद्धि करबा वाली
  • ◆शरण्ये — शरण देबा वाली
  • ◆त्र्यम्बके — तीन नेत्र वाली
  • ◆गौरि — उज्ज्वल, पवित्र स्वरूप
  • ◆नारायणि — नारायणक दिव्य शक्ति

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Originally published on MithilaDwaar · 14 July 2026 · Shivam Jha

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Cite: Maa Durga Aarti Collection — Jai Ambe Gauri, Jagdambe Kali & Sarvamangala — MithilaDwaar (https://www.mithiladwaar.com/blog/maa-durga-aarti-sangrah)

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