गंगा देवी (1928–1991) मधुबनी चित्रकलाक ओ महान गुरु छथि जिनकर रंगमे मिथिलाक सम्पूर्ण जीवन — हुनकर सुख, हुनकर पीड़ा, हुनकर संघर्ष — बजैत अछि। ओ मिथिला चित्रकलाकें गाम-घरसँ निकालि क' विश्व कला मंचधरि पहुँचेलनि।
प्रारंभिक जीवन#
गंगा देवीक जन्म मधुबनी जिलाक रत्ती गाममे एकटा कायस्थ परिवारमे भेल। मिथिलाक बहुत रास महिला जकाँ, ओ सेहो घरक भितरिया आँगन आ भितरक दीवारपर चित्रकला सीखलनि। ई कला हुनका माँ आ दादीसँ मौखिक परंपराक रूपमे भेटलनि।
कागजपर चित्रकलाक आरंभ#
1960-70क दशकमे, जखन भास्कर कुलकर्णी जेकाँ कला-विशेषज्ञ मिथिलाक महिला कलाकारकें कागजपर पेंटिंग करय लेल प्रोत्साहित केलनि, तखन गंगा देवीक प्रतिभा उजागर भेल। ओ अपन शैलीमे रेखाचित्र आ बारीक विवरणपर विशेष ध्यान दैत छलीह, जे हुनका बाकी कलाकारसँ अलग बनबैत छल।
कर्नाटक शैलीक विकास#
गंगा देवी "कर्नाटक" वा "भरनी" शैलीक विशेषज्ञ छलीह, जकरामे काला-सफेद रंगसँ बारीक रेखाचित्र बनाओल जाइत अछि। हुनकर काज एतेक विस्तृत आ सूक्ष्म छल जे एकर तुलना कोनो शास्त्रीय चित्रकलासँ कएल जा सकैत अछि। ओ धार्मिक कथा, प्रकृति आ सामाजिक विषयपर सेहो चित्र बनओलनि।
अंतर्राष्ट्रीय पहचान#
गंगा देवी 1980क दशकमे अमेरिका यात्रा केलनि, जतय हुनका "कैंसर सीरीज़" बनेबाक अनुभव भेल — जखन हुनका कैंसर पता चलल, तखन ओ अपन बीमारीक अनुभवकें चित्रकलाक माध्यमसँ व्यक्त केलनि। ई शृंखला हुनकर सबसँ मार्मिक आ प्रसिद्ध काज मानल जाइत अछि।
सम्मान आ विरासत#
गंगा देवीकें 1984मे पद्मश्री सम्मानसँ सम्मानित कएल गेल। हुनकर काज दुनियाभरिक संग्रहालयमे प्रदर्शित अछि, आ ओ मधुबनी चित्रकलाकें एकटा गाम्य कलासँ विश्व-प्रसिद्ध कलाक रूपमे स्थापित करबामे अग्रणी भूमिका निभेलनि।
निष्कर्ष#
गंगा देवी मिथिलाक जीवित सांस्कृतिक धरोहरकें समृद्ध करैत छथि — हुनकर रंग आ रेखा मिथिलाक स्त्री-शक्तिक अद्वितीय उदाहरण थिक।
"गंगा देवीक हर रेखामे मिथिलाक आत्माक धड़कन सुनल जा सकैत अछि।"
How did this make you feel?
Read next
Recommended
Madhubani Chitrakala — Matis thaki Vishwamanch dhari
18 min read





After the story
Comments (0)
Sign in to share your thoughts on this article.