झिझिया — मिथिलाक लोकनृत्य
लोककला· 14 min

JhijhiyaThe Folk Dance of Mithila

झिझिया — मिथिला का लोकनृत्य

विवेक झा·20 Mar 2026

Jhijhiya is a women's folk dance of Mithila, performed during Navratri, where women dance balancing an earthen pot with a glowing lamp on their heads — a breathtaking tradition.

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विवेक झा
Vivek Jha·14 min read·20 Mar 2026

झिझिया मिथिला आ उत्तर प्रदेशक एकटा अनोखा लोकनृत्य अछि जे नवरात्रिक नवमी रातिकेँ मनाओल जाइत अछि। महिला लोकनि माथ पर छिद्रित मिट्टीक घड़ा रखि, ओहिमे दीप जराकऽ नृत्य करैत छथि — संतुलन, श्रद्धा आ कलाक अद्भुत संगम।

झिझियाक उत्पत्ति आ पौराणिक संबंध#

लोककथानुसार देवी दुर्गाक नवरात्रि उपासनासँ झिझिया जुड़ल अछि। घड़ाक छिद्रसँ निकलैत दीपक रोशनी अंधकार पर विजयक प्रतीक मानल जाइत अछि। मिथिलाक गाम-गाममे ई नृत्य स्त्रीशक्तिक उपासना मानल जाइत अछि।

घड़ा, दीपक आ नृत्यक विशेषता#

  • ◆छिद्रित मिट्टीक घड़ा — रोशनी चारू ओर
  • ◆माथ पर संतुलित नृत्य — वर्षोंक अभ्यास
  • ◆गोलाकार सामूहिक नृत्य
  • ◆एक नेत्री गीत, अन्य दोहराबैत

झिझियाक गीत आ संगीत#

"झिझिया रे झिझिया, माय दुर्गाक झिझिया।

माथ पर घड़ा, मन में आस।

देवी मैया, पूरू हमर अभिलाष।।"

गीतमे देवीक प्रार्थना, फसलक मंगल, परिवारक सुखक कामना होइत अछि।

नवरात्रि संदर्भ#

नवमी राति — नवरात्रिक अंतिम रात। झिझिया उपवास, जागरण आ भक्तिक संग मनाओल जाइत अछि। मन्दिर, आंगन, चौक — सभ ठाम ई नृत्यक प्रस्तुति होइत अछि।

क्षेत्रीय विविधता#

मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर आ पूर्वी उत्तर प्रदेशक सीमामे झिझिया विभिन्न रूपमे देखल जाइत अछि। स्थानीय वेशभूषा, गीत आ तालमे भिन्नता रहैत अछि, मुदा मूल भाव एकहि।

आधुनिक पुनर्जीवन#

बिहार सरकारक झिझिया महोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिक्षण संस्थान — ई कलाकेँ नव पीढ़ी धरि पहुँचाबैत अछि। विदेशमे बसल मैथिल समुदाय सेहो ई नृत्यक संरक्षण करैत अछि।

कलाक ऐतिहासिक विकास#

झिझियाक इतिहास सदियों पुरान अछि। प्राचीन कालसँ मिथिलाक महिला सभ आंगन, दीवार, आ वस्तुपर ई कला अपन हाथसँ बनाबैत रहल छथि। कालांतरमे ई कला राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पटलपर पहुँचल — मुदा ग्रामीण मिथिलामे आजहियो ई परंपरा जीवित अछि।

तकनीक आ सामग्री#

झिझिया बनाबैत समय प्राकृतिक रंग, स्थानीय सामग्री, आ पारम्परिक औजारक प्रयोग होइत अछि। कलाकार अपन कौशल माता-दादीसँ सिखैत अछि — ई मौखिक परंपरा मिथिलाक हस्तकलाक आत्मा अछि।

सामाजिक आ आर्थिक महत्व#

आज झिझिया मिथिलाक हजारों महिलाक रोजगारक स्रोत बनल अछि। fair trade, self-help group, आ cultural tourism — एहि सभ मिलि कलाकारक आर्थिक सशक्तिकरण भेल अछि।

संरक्षण आ नव पीढ़ी#

स्कूल, cultural centre, आ digital platform — झिझियाक संरक्षणक नव उपाय अछि। नव पीढ़ीक लेल ई कला गर्व, पहचान, आ आजीविकाक पुल बनि सकैत अछि।

विरासत आ भविष्य#

झिझिया मिथिलाक सांस्कृतिक पहचानक अभिन्न अंग अछि। दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, सहरसा आ जनकपुर — सभ क्षेत्रमे ई परंपरा अलग-अलग रूपमे जीवित अछि। ग्रामीण मेला, पारिवारिक संस्कार, आ सामूहिक उत्सव — एहि सभ स्थलपर एकर जीवंत रूप देखल जा सकैत अछि। मिथिलाक युवा पीढ़ी, डिजिटल माध्यम, आ सांस्कृतिक संस्थासभ मिलि एकर संरक्षणक नव रास्ता खोलि रहल अछि। विदेशमे बसल मैथिल समुदाय सेहो अपन माटि, भाषा, आ रीति-रिवाजसँ जुड़ल रहैत अछि।

निष्कर्ष#

झिझिया केवल नृत्य नहि — मिथिलाक स्त्रीशक्ति, भक्ति आ सामूहिक एकताक जीवित प्रतीक अछि। माथ पर दीपक धरि नाचब — ई मिथिलाक महिलाक साहस, कौशल आ आस्थाक अनुपम अभिव्यक्ति अछि।

"झिझियाक दीपक — मिथिलाक आँगनमे जलैत अंधकार पर विजयक ज्योति अछि।"

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Originally published on MithilaDwaar · 20 March 2026 · Vivek Jha

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Cite: Jhijhiya — The Folk Dance of Mithila — MithilaDwaar (https://www.mithiladwaar.com/blog/jhijhiya-mithila-ka-lok-nritya)

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