मैथिली लोकगीत मिथिलाक जनजीवन, संस्कृति, भावनात्मक संसार आ सामाजिक परम्पराक जीवित अभिव्यक्ति थिक। ई गीत केवल मनोरञ्जनक साधन नहि, बल्कि जन्मसँ मृत्यु धरि मनुष्यक सम्पूर्ण जीवनयात्राक संगी बनि कऽ चलैत अछि। मैथिली लोकगीतक विशेषता ई अछि जे एकर ज्ञान कोनो विद्यालय वा शास्त्रसँ नहि, बल्कि माँसँ बेटी, आजीसँ नातिन आ एक पीढ़ीसँ दोसर पीढ़ीमे स्वाभाविक रूपेँ स्थानान्तरित होइत अछि।
मिथिलाक प्रत्येक संस्कार, पर्व-त्योहार, कृषि कार्य, ऋतु परिवर्तन, भक्ति, प्रेम, विरह आ सामाजिक उत्सवमे लोकगीतक विशेष स्थान अछि। एहि गीतसभमे मिथिलाक माटिक सोंध सुगन्ध, लोकजीवनक सरलता आ भावनाक गहराइ स्पष्ट रूपसँ अनुभव कएल जा सकैत अछि।
लोकगीतक विशेषता#
- ◆सरल आ सहज भाषा
- ◆लोकजीवनसँ गहींर सम्बन्ध
- ◆मौखिक परम्परासँ संरक्षित
- ◆सामूहिक गायनक परम्परा
- ◆भाव, रस आ संगीतक अद्भुत समन्वय
- ◆संस्कार आ पर्व-त्योहारसँ घनिष्ठ सम्बन्ध
मैथिली लोकगीतक प्रमुख प्रकार#
सोहरजन्मक गीत#
शिशुक जन्मक अवसरपर महिलासभ द्वारा गाओल जाएवला गीतकेँ सोहर कहल जाइत अछि। एहि गीतसभमे नवजात शिशुक स्वागत, मातृत्वक आनन्द आ परिवारक प्रसन्नताक भाव प्रकट होइत अछि।
"कहाँ सँ आयल रे लाल हमर आँगनमे।
माँ-बाबूक लाल, सबके दुलारा।।"
सोहर गीत मिथिलाक प्रत्येक घरमे पीढ़ीसँ पीढ़ी गाओल जाइत रहल अछि।
मड़वा गीत#
विवाहक अवसरपर मण्डप (मड़वा) गड़बाक समय गाओल जाएवला गीत मड़वा गीत कहल जाइत अछि। एहि गीतसभमे उल्लास, मंगलकामना आ हास्यक सुन्दर मिश्रण भेटैत अछि।
"मड़वा गड़ल आँगनमे, बाजल शुभ शहनाइ।
आयल बरियाती, मनाउ बधाइ।।"
लगनी गीत#
विवाह संस्कारक विभिन्न अवसरपर लगनी गीत गाओल जाइत अछि। वर-यात्रा, कन्यादान, कोहबर आ अन्य रस्मसभमे महिलासभ सामूहिक रूपसँ ई गीत गबैत छथि।
लगनी गीत मिथिलाक विवाह संस्कृतिक आत्मा मानल जाइत अछि।
समदाउन गीत#
कन्याविदाईक समय गाओल जाएवला भावपूर्ण गीतकेँ समदाउन कहल जाइत अछि। एहि गीतसभमे माता-पिता, भाई-बहिन आ कन्याक भावनात्मक सम्बन्धक मार्मिक चित्रण भेटैत अछि।
समदाउन गीत सुनि कतेको बेर वातावरण भावुक भऽ जाइत अछि।
निष्कर्ष#
ई परम्परा मिथिलाक जीवित सांस्कृतिक धरोहरकेँ समृद्ध करैत अछि।
"मिथिला अपन भाषा, कला, पर्व आ परम्परामे बसैत अछि।"






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