भिखारी ठाकुर (1887–1971) एकटा नाई-नाटककार छलाह जे अपन लोकनाट्यसँ बिहारक सामाजिक समस्यापर एतेक गहरा टिप्पणी केलनि जे हुनका शेक्सपियरसँ तुलना कएल जाइत अछि। यद्यपि ओ मैथिल नहि, भोजपुरी क्षेत्रक छलाह, मुदा मिथिला आ भोजपुर क्षेत्रक सांस्कृतिक निकटताक कारण हुनकर प्रभाव मिथिलाक लोकनाट्य-परंपरापर सेहो पड़ल।
प्रारंभिक जीवन#
भिखारी ठाकुर सारण जिलाक कुतुबपुर गाममे एकटा गरीब नाई परिवारमे जन्म लेलनि। औपचारिक शिक्षा नहि पेला बादो हुनकामे असाधारण प्रतिभा छलनि। ओ मुंबईमे मजदूरीक काज करैत छला, जतय ओ शहरी जीवनक विषमता आ ग्रामीण जीवनक कष्टकें नजदीकसँ देखलनि — ई अनुभव हुनकर नाटकक विषय-वस्तु बनल।
"बिदेसिया"प्रवासक त्रासदी#
भिखारी ठाकुरक सबसँ प्रसिद्ध नाटक "बिदेसिया" थिक, जे परदेस कमेबाक लेल गेल पतिक बाट जोहैत पत्नीक व्यथाकें दर्शाबैत अछि। ई नाटक प्रवास, विरह आ नारीक अकेलापनकें एतेक मार्मिक ढंगसँ प्रस्तुत करैत अछि जे ई भोजपुरी लोकनाट्यक एकटा क्लासिक बनि गेल।
सामाजिक टिप्पणी#
भिखारी ठाकुरक नाटकमे दहेज-प्रथा, बहु-विवाह, नशाखोरी आ जातिभेद जेकाँ सामाजिक बुराइपर तीखी टिप्पणी होइत छल। ओ अपन नाटकमे स्त्रीक भूमिका स्वयं पुरुष कलाकारसँ करबबैत छलाह, जे ओहि समयक सामाजिक सीमाकें देखैत एकटा साहसिक कदम छल।
शैली आ प्रभाव#
भिखारी ठाकुरक नाट्यशैली लोकगीत, नृत्य आ संवादक मिश्रण छल, जकरा "नाच" शैली कहल जाइत अछि। हुनकर मंडली गाम-गाम घूमि क' प्रदर्शन करैत छल, आ आम जनतासँ सीधा जुड़ाव राखैत छल। एहि कारण भारत सरकार हुनका "भोजपुरीक शेक्सपियर" जेकाँ सम्मान देलक।
विरासत#
आजुओ भिखारी ठाकुरक नाटक भोजपुरी आ मैथिली दुनू क्षेत्रमे मंचित होइत अछि। हुनकर जन्मशताब्दीपर भारत सरकार डाक टिकट जारी केलक, आ हुनका पर अनेक शोध-ग्रंथ लिखल गेल अछि। हुनकर विरासत आइयो लोकनाट्यक विद्यार्थीक लेल प्रेरणाक स्रोत थिक।
निष्कर्ष#
भिखारी ठाकुर मिथिला-भोजपुर क्षेत्रक जीवित सांस्कृतिक धरोहरकें समृद्ध करैत छथि — ओ सिखबैत छथि जे साधारण पृष्ठभूमिसँ सेहो असाधारण कला जन्म लऽ सकैत अछि।
"भिखारी ठाकुरक नाटकमे आम जनताक दुख आ हास्य दुनू एक साथ बसैत अछि।"






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