मिथिलाक गाममे जँ कोनो कन्याक बियाह होइत हो, आंगनमे समदाउन गूंजैत हो, विदाइक समय माय-बापक आँखि नम भऽ रहल हो, सामा-चकेवाक दिन बहिनसभ गीत गाबि रहल हो अथवा छठक घाट पर अस्ताचलगामी सूर्यकेँ अर्घ्य देबाक तैयारी चलि रहल हो—एहन बहुत कम अवसर होएत जतय शारदा सिन्हाक स्वर सुनाइ नहि पड़ैत हो।
मिथिलाक लोकजीवनमे किछु नाम केवल व्यक्ति नहि रहैत अछि, ओ परंपरा बनि जाइत अछि। शारदा सिन्हा एहनहि एक नाम छथि। हुनकर स्वर लाखों लोकक बचपन, संस्कार, विवाह, पर्व-त्योहार आ स्मृतिक संग जुड़ल अछि। एहि कारण मिथिलामे बहुत लोक हुनका केवल गायिका नहि, बल्कि अपन सांस्कृतिक परिवारक सदस्य मानैत छथि।
शारदा सिन्हाक जन्म 1 अक्टूबर 1952 केँ बिहारक सुपौल जिलाक हुलास गाममे भेल छल। बचपनसँ संगीतक वातावरण हुनका आकर्षित करैत छल। ओहि समय गाममे रेडियो सीमित घरमे रहैत छल, मुदा लोकगीत हर घरमे जीवित छल।
आंगनमे महिलासभ विवाह गीत गबैत छलीह, सोहर गाओल जाइत छल, सामा-चकेवाक गीत सुनाइ पड़ैत छल। ई सभ वातावरण शारदा सिन्हाक मनमे संगीतप्रतिक प्रेम जगबैत गेल।
धीरे-धीरे ओ संगीतक औपचारिक शिक्षा ग्रहण केलनि आ अपन प्रतिभाक बल पर लोकसंगीतक क्षेत्रमे विशिष्ट स्थान बनौलनि।
लोकगीतसँ जुड़बाक यात्रा#
जखन शारदा सिन्हा गायन शुरू केलनि, तखन लोकगीत मुख्य रूपसँ गामक सीमामे सिमटल छल। विवाहक गीत विवाहमे, सोहर जन्मोत्सवमे, आ पर्वक गीत पर्वक अवसरपर गाओल जाइत छल।
शारदा सिन्हाक सबसे पैघ योगदान ई रहल जे ओ लोकगीतकेँ मंच, रेडियो, कैसेट आ बादमे दूरदर्शन धरि पहुँचौलनि।
हुनका कारण मिथिलाक लोकधुन केवल मिथिलामे नहि, बल्कि देशक विभिन्न भागमे सुनल जाए लागल।
मैथिली गीतक लोकप्रियता#
शारदा सिन्हाक नाम लेलाक संग मैथिली लोकगीत स्वतः स्मरण भऽ जाइत अछि।
हुनकर स्वरमे एहन अपनापन छल जे सुननिहारकेँ लगैत छल जे गामक कोनो अपन महिला गीत गाबि रहल छथि।
विवाह गीत, कोहबर गीत, समदाउन, सोहर, सामा-चकेवा, मधुश्रावणी, कोजगरा—प्रायः हर विधाक गीत हुनका गाओल भेटैत अछि।
मिथिलाक हजारों परिवारमे विवाहक तैयारीक समय आइयो शारदा सिन्हाक गीत बजाओल जाइत अछि।
विवाह गीतक रानी#
मिथिलाक विवाह केवल एक सामाजिक आयोजन नहि, बल्कि गीत-संगीतक महाउत्सव होइत अछि।
हल्दी सँ लऽ कऽ विदाई धरि प्रत्येक संस्कारक अपन गीत अछि।
शारदा सिन्हा एहि गीतसभकेँ एहन ढंगसँ प्रस्तुत केलनि जे ओ पीढ़ी दर पीढ़ी सुनल जाइत रहल।
विदाइक समय हुनकर गीत सुनि कतेको लोकक आँखि भरि आबैत अछि।
आजुक आधुनिक विवाहमे डीजे आ आधुनिक संगीतक प्रचलन बढ़ल अछि, मुदा जखन वास्तविक मैथिल संस्कार शुरू होइत अछि, तखन शारदा सिन्हाक स्वर अवश्य सुनाइ पड़ैत अछि।
छठ पर्व आ शारदा सिन्हा#
जँ कोनो एक पर्व शारदा सिन्हाक नामक संग सबसे बेसी जुड़ल अछि, तँ ओ अछि छठ।
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपालक तराई आ प्रवासी समाजमे छठक समय शारदा सिन्हाक गीत सर्वाधिक सुनल जाइत अछि।
बहुत लोक कहैत छथि जे छठ आ शारदा सिन्हा एक-दोसरक पर्याय बनि गेल अछि।
हुनकर कतेको गीत लोकआस्थाक हिस्सा बनि गेल।
लोक घरक साफ-सफाई करैत छथि, घाट सजबैत छथि, प्रसाद बनबैत छथि आ पृष्ठभूमिमे शारदा सिन्हाक स्वर गूंजैत रहैत अछि।
ई स्थिति दशकौं धरि बनल रहल।
सबसे प्रसिद्ध गीत#
शारदा सिन्हाक हजारों गीत लोकप्रिय भेल, मुदा किछु गीत एहन छथि जे लगभग प्रत्येक मैथिल आ बिहारी परिवार सुनने होएत।
छठ गीतसभमे—पहिले पहिल छठी मैया, हो दीनानाथ, केलवा के पात पर, उग हो सूरज देव—बहुत प्रसिद्ध भेल।
विवाह गीतसभमे सेहो हुनकर अनेक रचना अत्यन्त लोकप्रिय छथि।
हिन्दी चलचित्रमे गाओल “कहे तोसे सजना” आ “बाबुल” सेहो लोकक बीच बहुत चर्चित रहल।
लोकक संग भावनात्मक सम्बन्ध#
शारदा सिन्हाक लोकप्रियताक कारण केवल हुनकर आवाज नहि छल।
लोक हुनका अपन मानैत छल।
गामक महिलासभ हुनकर गीत सीखि कऽ गबैत छलीह। विवाहमे बुजुर्ग महिला कहैत छलीह—“शारदा जी वाला गीत बजाउ।”
छठक समय लोक कहैत छल—“छठ तखन शुरू होएत जखन शारदा सिन्हाक गीत बजत।”
ई सम्बन्ध केवल कलाकार आ श्रोताक नहि, बल्कि सांस्कृतिक आत्मीयताक छल।
सम्मान आ उपलब्धि#
लोकसंगीतमे योगदानक लेल भारत सरकार हुनका अनेक महत्वपूर्ण सम्मानसँ सम्मानित केलक।
हुनका पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार आ पद्मभूषण प्रदान कएल गेल। बादमे हुनका मरणोपरान्त पद्मविभूषण सेहो प्रदान कएल गेल।
मिथिलाक लोक एहि सम्मानकेँ केवल शारदा सिन्हाक नहि, बल्कि सम्पूर्ण लोकसंस्कृतिक सम्मान मानैत छथि।
अंतिम समय#
जीवनक अंतिम वर्षसभमे शारदा सिन्हा गंभीर बीमारीसँ संघर्ष करैत रहलीह।
2024 मे हुनकर स्वास्थ्य लगातार कमजोर होइत गेल। दिल्लीमे उपचार चलि रहल छल।
5 नवम्बर 2024 केँ 72 वर्षक आयुमे हुनकर निधन भऽ गेल।
निधनक समाचार फैलिते बिहार, मिथिला आ सम्पूर्ण देशमे शोकक लहर दौड़ि गेल।
विशेष बात ई छल जे ओहि समय छठ पर्वक वातावरण बनि रहल छल आ घर-घरमे हुनक गीत गूंजि रहल छल। एहि कारण बहुत लोक एहि क्षतिकेँ व्यक्तिगत क्षति जेकाँ अनुभव केलक।
अंतिम विदाई#
हुनका राजकीय सम्मानक संग अंतिम विदाई देल गेल। हजारों लोक श्रद्धांजलि अर्पित करबाक लेल पहुँचला।
बहुत लोकक लेल ई केवल एक गायिकाक विदाई नहि छल, बल्कि एक युगक समापन छल।
शारदा सिन्हाक विरासत#
कलाकारक वास्तविक पहचान पुरस्कारसँ नहि, बल्कि लोकस्मृतिसँ होइत अछि।
शारदा सिन्हाक स्वर आजुओ विवाहमे सुनाइ पड़ैत अछि।
छठक घाटपर सुनाइ पड़ैत अछि।
सामा-चकेवामे सुनाइ पड़ैत अछि।
मधुश्रावणीक गीतमे सुनाइ पड़ैत अछि।
मिथिलाक कन्याक विदाइमे सुनाइ पड़ैत अछि।
आ सम्भवतः आनेको वर्ष धरि सुनाइ पड़ैत रहत।
निष्कर्ष#
शारदा सिन्हा केवल एक प्रसिद्ध गायिका नहि छलीह। ओ मिथिलाक माटिक सुगन्ध, लोकजीवनक भावना, संस्कारक आत्मा आ लोकगीतक जीवित स्वर छलीह। हुनकर गीत पीढ़ी दर पीढ़ी लोकक संग चलैत रहल अछि आ आगुओ चलैत रहत। कतेको कलाकार लोकप्रिय होइत छथि, मुदा बहुत कम कलाकार एहन होइत छथि जे एक सम्पूर्ण संस्कृति केर आवाज बनि जाइत छथि। शारदा सिन्हा ओहि दुर्लभ कलाकारसभमे सँ एक छलीह, जिनकर स्वर समयक सीमासँ बाहर निकलि कऽ लोकस्मृतिमे अमर भऽ गेल अछि।







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