कजरी तीज मिथिलाक ओ मीठ पर्व थिक जखन स्त्रीगण झूलापर झूलैत कजरी गीत गबैत वर्षा ऋतुक स्वागत करैत छथि। ई पर्व सावन मासमे मनाओल जाइत अछि, जखन मिथिलाक धरती हरियरीसँ भरि जाइत अछि।
कजरी गीतक परंपरा#
कजरी गीत वर्षा ऋतुक लोकगीतक एकटा विशेष शैली थिक, जकरामे विरह, प्रेम आ प्रकृतिक सौंदर्यक वर्णन होइत अछि। ई गीत विशेष रूपसँ स्त्रीगण गबैत छथि, आ एकर धुन धीमा आ भावुक होइत अछि, जे बरखाक मौसमक वातावरणसँ मेल खाइत अछि।
झूला परंपरा#
सावन मासमे मिथिलाक गाम-गाममे बाग-बगीचामे झूला लगाओल जाइत अछि। स्त्रीगण आ लड़की झूलापर झूलैत, एक-दोसराक संग हँसी-ठिठोली करैत, कजरी गीत गबैत छथि। ई परंपरा स्त्रीगणकें घरेलू काजसँ किछु समय निकालि क' आनंद उठेबाक अवसर दैत अछि।
तीजक पौराणिक कथा#
तीजक संबंध माता पार्वतीक भगवान शिवकें पतिक रूपमे प्राप्त करबाक कठिन तपस्यासँ जोड़ल जाइत अछि। मिथिलाक स्त्रीगण एहि दिन व्रत राखि क' अपन पतिक दीर्घायु आ सुखी दांपत्य जीवनक कामना करैत छथि।
सामाजिक महत्व#
कजरी तीज स्त्रीगणकें एकटा सामाजिक मंच प्रदान करैत अछि, जतय ओ एक साथ भेल गप-सप, गीत-संगीत आ सामूहिक आनंदमे भाग लैत छथि। मायकासँ आएल स्त्रीगण एहि पर्वपर विशेष रूपसँ अपन मायकाक याद करैत छथि, जकरा "बाबाक घर" जेबाक परंपरा सेहो कहल जाइत अछि।
आधुनिक संदर्भ#
आजुक समयमे शहरीकरणक कारण झूला आ सामूहिक गीत-गानक परंपरा किछु घटल अछि, मुदा गाम-गाममे ई पर्व आइयो पूरा उत्साहसँ मनाओल जाइत अछि। सोशल मीडियापर सेहो कजरी गीतक वीडियो साझा कएल जाइत अछि, जकरासँ ई परंपरा नव पीढ़ी धरि पहुँचि रहल अछि।
निष्कर्ष#
कजरी तीज मिथिलाक जीवित सांस्कृतिक धरोहरकें समृद्ध करैत अछि — ई पर्व वर्षा, प्रेम आ स्त्री-सामूहिकताक मीठ संगम थिक।
"कजरीक धुनमे मिथिलाक बरखाक सम्पूर्ण सौंदर्य बसैत अछि।"
How did this make you feel?
Read next
Same festival
Chhath Puja — Surya, Nadi A Asthak Mahaparva
16 min read







After the story
Comments (0)
Sign in to share your thoughts on this article.